Sri Ram Exams • UPSC • PCS • SSC • Daily PracticeSunday, 6 September 2026
Sri Ram Exams logoSri Ram ExamsRead • Practice • Improve
September 5, 2026
Mains Answer Writing
10 Marks250 Words7 min

“Delimitation of parliamentary constituencies on the basis of population ensures equality of representation, but it may also create a sense of federal injustice among states that have successfully controlled their population.” Critically examine this statement in the context of the forthcoming Census and delimitation exercise.

“जनसंख्या के आधार पर संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन प्रतिनिधित्व की समानता सुनिश्चित करता है, किंतु यह जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के साथ संघीय अन्याय भी उत्पन्न कर सकता है।” आगामी जनगणना एवं परिसीमन की पृष्ठभूमि में इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

7:00
Words: 0 / 250
View Model Answer

प्रस्तावना

लोकतंत्र का आधार “एक व्यक्ति–एक मत–एक मूल्य” है। अतः जनसंख्या परिवर्तन के अनुरूप निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण आवश्यक है। संविधान के अनुच्छेद 81, 82, 170 तथा 327 परिसीमन की संवैधानिक आधारभूमि निर्मित करते हैं। किंतु भारत जैसे असमान जनांकिकीय विकास वाले संघ में परिसीमन केवल गणितीय नहीं, बल्कि राजनीतिक और संघीय न्याय का प्रश्न भी है।

मुख्य उत्तर

परिसीमन की आवश्यकता के प्रमुख आधार हैं—

निर्वाचन क्षेत्रों के बीच जनसंख्या-असमानता को कम करना।
प्रवासन तथा नगरीकरण से उभरे नए प्रतिनिधित्व-संकट का समाधान।
अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए आरक्षित सीटों का तार्किक पुनर्निर्धारण।
लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को नवीन जनांकिकीय वास्तविकताओं के अनुरूप बनाना।

इसके विपरीत केवल जनसंख्या आधारित परिसीमन कई समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है। दक्षिणी और कुछ पश्चिमी राज्यों ने शिक्षा, महिला सशक्तीकरण तथा परिवार नियोजन द्वारा जनसंख्या वृद्धि नियंत्रित की है। यदि अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को अनुपात से अधिक सीटें मिलती हैं, तो सफल राज्यों को अपने बेहतर प्रदर्शन का राजनीतिक दंड मिलने की आशंका होगी। इससे संसद में क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन, वित्तीय संघवाद तथा भाषा-संस्कृति संबंधी आशंकाएँ बढ़ सकती हैं।

साथ ही, जनगणना में जातिगत आँकड़े सामाजिक न्याय की नीतियों को अधिक प्रमाण-आधारित बना सकते हैं; परंतु त्रुटिपूर्ण वर्गीकरण, राजनीतिक ध्रुवीकरण, निजता तथा आँकड़ों के दुरुपयोग का जोखिम भी है।

समाधान के लिए लोकसभा की कुल सीटें बढ़ाकर राज्यों का वर्तमान आनुपातिक हिस्सा सुरक्षित किया जा सकता है। एक स्वतंत्र परिसीमन आयोग, पारदर्शी सार्वजनिक परामर्श तथा जनसंख्या के साथ भौगोलिक क्षेत्र, प्रशासनिक कठिनाई और जनांकिकीय प्रदर्शन जैसे मानदंड अपनाए जाने चाहिए।

निष्कर्ष

परिसीमन का उद्देश्य केवल जनसंख्या-समानता नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व, संघीय विश्वास और राष्ट्रीय एकता के बीच संवैधानिक संतुलन स्थापित करना होना चाहिए।

विद्यार्थी के लिए प्रस्तुतीकरण सुझाव

उत्तर के मध्य यह छोटा प्रवाह-चित्र बनाया जा सकता है:
उत्तर में 84वाँ संविधान संशोधन, अनुच्छेद 82 और “जनसंख्या नियंत्रण पर राजनीतिक दंड” जैसे शब्द रेखांकित करने से विश्लेषणात्मक गुणवत्ता बढ़ेगी।