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“हरित ऊर्जा की ओर संक्रमण ने जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को समाप्त नहीं किया है, बल्कि उसे महत्त्वपूर्ण खनिजों पर नई निर्भरता में परिवर्तित कर दिया है।” भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के संदर्भ में विवेचना कीजिए।
“हरित ऊर्जा की ओर संक्रमण ने जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को समाप्त नहीं किया है, बल्कि उसे महत्त्वपूर्ण खनिजों पर नई निर्भरता में परिवर्तित कर दिया है।” भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के संदर्भ में विवेचना कीजिए।
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प्रस्तावना
लिथियम, कोबाल्ट, निकल, ग्रेफाइट तथा दुर्लभ मृदा तत्त्व आधुनिक अर्थव्यवस्था के “रणनीतिक आधारभूत पदार्थ” हैं। इनका उपयोग विद्युत वाहनों, सौर पैनलों, बैटरियों, अर्धचालकों, दूरसंचार और रक्षा प्रणालियों में होता है। इसलिए हरित संक्रमण का अर्थ खनिज निर्भरता से मुक्ति नहीं, बल्कि उसकी प्रकृति में परिवर्तन है।
मुख्य उत्तर
भारत के लिए महत्त्वपूर्ण खनिजों का महत्त्व अनेक आयामों में है—
ऊर्जा आयाम: बैटरी भंडारण और विद्युत वाहनों के विस्तार के लिए लिथियम, निकल तथा कोबाल्ट आवश्यक हैं।
औद्योगिक आयाम: घरेलू खनिज उपलब्धता उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन, इलेक्ट्रॉनिकी और उन्नत विनिर्माण को गति देगी।
सामरिक आयाम: दुर्लभ मृदा तत्त्व मिसाइल, रडार, ड्रोन तथा संचार प्रणालियों के लिए आवश्यक हैं।
भू-राजनीतिक आयाम: खनन और प्रसंस्करण का कुछ देशों में संकेंद्रण आपूर्ति को आर्थिक दबाव के साधन में बदल सकता है।
पर्यावरणीय आयाम: खनन से वन-विनाश, जल प्रदूषण, विस्थापन और जनजातीय अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
भारत की प्रमुख कमजोरियाँ सीमित अन्वेषण, निम्न प्रसंस्करण क्षमता, आयात निर्भरता, तकनीकी अभाव तथा खनन परियोजनाओं की लंबी स्वीकृति प्रक्रिया हैं। केवल घरेलू खनन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा।
भारत को “सम्पूर्ण मूल्य-श्रृंखला रणनीति” अपनानी चाहिए—देश में वैज्ञानिक अन्वेषण, विदेशों में खनिज परिसंपत्तियों का अधिग्रहण, मित्र देशों के साथ आपूर्ति साझेदारी, रणनीतिक भंडार, खनिज प्रसंस्करण तथा बैटरी-पुनर्चक्रण। नगरीय खनन के माध्यम से ई-कचरे और अनुपयोगी बैटरियों से खनिज प्राप्त किए जा सकते हैं। स्थानीय समुदायों की पूर्व सहमति, जिला खनिज प्रतिष्ठान का प्रभावी उपयोग और कठोर पर्यावरणीय मूल्यांकन भी आवश्यक हैं।
निष्कर्ष
वास्तविक आत्मनिर्भरता खनिज भंडार रखने में नहीं, बल्कि अन्वेषण से लेकर पुनर्चक्रण तक संपूर्ण मूल्य-श्रृंखला पर विश्वसनीय क्षमता विकसित करने में निहित है।
विद्यार्थी के लिए प्रस्तुतीकरण सुझाव
मुख्य उत्तर के बाद यह मूल्य-श्रृंखला बनाई जा सकती है:
अन्वेषण → खनन → प्रसंस्करण → विनिर्माण → उपयोग → पुनर्चक्रण → पुनः उत्पादन
उत्तर में केवल समस्याएँ न लिखें। ऊर्जा, अर्थव्यवस्था, रक्षा, भू-राजनीति, पर्यावरण और सामाजिक न्याय—इन छह आयामों को अलग-अलग दिखाएँ। “नगरीय खनन”, “रणनीतिक भंडार” और “चक्रीय अर्थव्यवस्था” जैसे शब्द उत्तर को सामान्य विवरण से ऊपर उठाते हैं।
प्रस्तावना
लिथियम, कोबाल्ट, निकल, ग्रेफाइट तथा दुर्लभ मृदा तत्त्व आधुनिक अर्थव्यवस्था के “रणनीतिक आधारभूत पदार्थ” हैं। इनका उपयोग विद्युत वाहनों, सौर पैनलों, बैटरियों, अर्धचालकों, दूरसंचार और रक्षा प्रणालियों में होता है। इसलिए हरित संक्रमण का अर्थ खनिज निर्भरता से मुक्ति नहीं, बल्कि उसकी प्रकृति में परिवर्तन है।
मुख्य उत्तर
भारत के लिए महत्त्वपूर्ण खनिजों का महत्त्व अनेक आयामों में है—
ऊर्जा आयाम: बैटरी भंडारण और विद्युत वाहनों के विस्तार के लिए लिथियम, निकल तथा कोबाल्ट आवश्यक हैं।
औद्योगिक आयाम: घरेलू खनिज उपलब्धता उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन, इलेक्ट्रॉनिकी और उन्नत विनिर्माण को गति देगी।
सामरिक आयाम: दुर्लभ मृदा तत्त्व मिसाइल, रडार, ड्रोन तथा संचार प्रणालियों के लिए आवश्यक हैं।
भू-राजनीतिक आयाम: खनन और प्रसंस्करण का कुछ देशों में संकेंद्रण आपूर्ति को आर्थिक दबाव के साधन में बदल सकता है।
पर्यावरणीय आयाम: खनन से वन-विनाश, जल प्रदूषण, विस्थापन और जनजातीय अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
भारत की प्रमुख कमजोरियाँ सीमित अन्वेषण, निम्न प्रसंस्करण क्षमता, आयात निर्भरता, तकनीकी अभाव तथा खनन परियोजनाओं की लंबी स्वीकृति प्रक्रिया हैं। केवल घरेलू खनन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा।
भारत को “सम्पूर्ण मूल्य-श्रृंखला रणनीति” अपनानी चाहिए—देश में वैज्ञानिक अन्वेषण, विदेशों में खनिज परिसंपत्तियों का अधिग्रहण, मित्र देशों के साथ आपूर्ति साझेदारी, रणनीतिक भंडार, खनिज प्रसंस्करण तथा बैटरी-पुनर्चक्रण। नगरीय खनन के माध्यम से ई-कचरे और अनुपयोगी बैटरियों से खनिज प्राप्त किए जा सकते हैं। स्थानीय समुदायों की पूर्व सहमति, जिला खनिज प्रतिष्ठान का प्रभावी उपयोग और कठोर पर्यावरणीय मूल्यांकन भी आवश्यक हैं।
निष्कर्ष
वास्तविक आत्मनिर्भरता खनिज भंडार रखने में नहीं, बल्कि अन्वेषण से लेकर पुनर्चक्रण तक संपूर्ण मूल्य-श्रृंखला पर विश्वसनीय क्षमता विकसित करने में निहित है।
विद्यार्थी के लिए प्रस्तुतीकरण सुझाव
मुख्य उत्तर के बाद यह मूल्य-श्रृंखला बनाई जा सकती है:
अन्वेषण → खनन → प्रसंस्करण → विनिर्माण → उपयोग → पुनर्चक्रण → पुनः उत्पादन
उत्तर में केवल समस्याएँ न लिखें। ऊर्जा, अर्थव्यवस्था, रक्षा, भू-राजनीति, पर्यावरण और सामाजिक न्याय—इन छह आयामों को अलग-अलग दिखाएँ। “नगरीय खनन”, “रणनीतिक भंडार” और “चक्रीय अर्थव्यवस्था” जैसे शब्द उत्तर को सामान्य विवरण से ऊपर उठाते हैं।
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